मदद या स्वार्थ?

उस व्यक्ति का कभी सहारा मत लो जो किसी और को गिराने के लिए आपकी मदद करता है क्योंकि वो व्यक्ति तब तक ही आपकी मदद करेगा जब तक उसे आपकी जरूरत है और अपने स्वार्थ के लिए आपको भी गिराने से पीछे नहीं हटेगा।

इसलिए उस व्यक्ति की मदद लिजिए जो सच में सिर्फ आपकी मदद करने के लिए ही आपको सहारा दे रहा है।

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जरूरी है तनाव से बचाव

जब हम तनाव की स्थिति से गुजर रहे होते हैं तो सबसे पहले जरूरी है कि उस तनाव से कैसे भी बाहर निकला जाए…जब एक बार हम तनाव से बाहर आ जाएंगे तो बिगङी हुई चीजों को सही कर सकेंगे और एक बेहतर,खुशनुमा और स्वस्थ जिंदगी जी पाएंगे इसलिए जरूरी है खुद को सब ठीक होने का दिलासा देना।

“कभी कभार खुद को दिए गए झूठे दिलासे और सब सही होने की कल्पना भी हमें तनाव से बाहर निकलने में हमारी मदद करती है”

जो आज भी याद आता है

उसकी बेवजह-सी हँसी

और उसका बात- बात पर किसी अनजान से

जिक्र पर चुप होना

यूं ही नहीं है

कोई पुराना और बहुत अजीज था

जो आज भी याद आता है

उसका तन्हाईयों में

मसरूफ रहना

और कभी भीड़ में भी

घण्टों अकेले बैठना

यूं ही नहीं है

कोई तो था

जिसके नाम उसका वक्त था

जो आज भी याद आता है

~ ऋतु त्रिवेदी

जमाना

“जो लोग कहते हैं जमाना खराब है
वो लोग किस जमाने में रहते हैं”

“कत्लेआम हुआ है जमाने में
जमाने के लोग जमाने को दोषी ठहराते हैं”

“जमाना जीने नहीं देता
फिर भी जीने को कहता है”

कोई यूं ही ना…

खुद के लफ्जों को
कोई यूं ही ना
अंदर दफन करे
कोई तो ईमान से हो
जो किसी के राज को
अपने अंदर भी दफन करे
अपने इश्क को
कोई यूं ही ना
अंदर जाया करे
कोई तो दिल पर चोट खाया हो
जो किसी के इश्क को
अपने अंदर भी महफूज करे

~ ऋतु त्रिवेदी

बदलाव…

बदलाव अगर धीरे-धीरे हो
तो अच्छा रहता है
बदलाव अच्छा हो या बुरा
अगर एकदम और तेजी से होता है तो फिर
बदलाव कहीं न कहीं एक तबाही की कहानी बयां करता नजर आता है।